क्या अब हर पेमेंट पर कटेगा चार्ज? जानिए आम जनता और दुकानदारों के लिए क्या बदला
आज के समय में UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) हमारे दैनिक जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। सुबह की चाय से लेकर राशन, कपड़े और ऑनलाइन शॉपिंग तक, हम सब किसी न किसी रूप में डिजिटल पेमेंट पर निर्भर हैं। पिछले कुछ वर्षों में UPI ने नकद लेन-देन की जगह इतनी तेजी से ली है कि आज देश में हर महीने अरबों ट्रांजेक्शन UPI के जरिए होते हैं। ऐसे में जब भी सरकार या रिज़र्व बैंक की ओर से UPI से जुड़े किसी नए नियम की खबर आती है, तो आम जनता से लेकर छोटे-बड़े दुकानदारों तक सभी के मन में सवाल उठने लगते हैं। हाल ही में UPI New Rules 2026 को लेकर भी कुछ ऐसा ही हुआ है, और सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब हर UPI पेमेंट पर अतिरिक्त चार्ज देना होगा। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से, आसान भाषा में समझते हैं।
क्या है नया नियम?
सरकार ने Payment and Settlement Systems Act, 2007 के तहत एक नई अधिसूचना जारी की है, जिसके अनुसार ₹2,000 तक के UPI लेन-देन और RuPay डेबिट कार्ड से किए गए भुगतान पूरी तरह चार्ज-फ्री बने रहेंगे। असली बदलाव ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट (दुकानदार) पेमेंट को लेकर है। इन पर अब 0.4% की दर से MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू किया जा रहा है। यह नया ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से प्रभाव में आ रहा है, और नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की स्टीयरिंग कमेटी ने इसकी दरें और शर्तें पहले ही तय कर दी हैं।
MDR क्या होता है और क्यों जरूरी है?
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो बैंकों, पेमेंट नेटवर्क और NPCI को डिजिटल ट्रांजेक्शन प्रोसेस करने, सिस्टम को सुरक्षित रखने और उसकी इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए चुकाना पड़ता है। गौर करने वाली बात यह है कि जनवरी 2020 से UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर MDR पूरी तरह माफ कर दिया गया था, जिससे यह सेवा उपयोगकर्ताओं और दुकानदारों दोनों के लिए मुफ्त बनी रही। हालांकि इसका मतलब यह नहीं था कि सिस्टम को चलाने की लागत खत्म हो गई थी – सरकार अब तक बैंकों और NPCI को यह लागत सब्सिडी के रूप में चुकाती आई है। बढ़ते ट्रांजेक्शन वॉल्यूम, साइबर सुरक्षा और फ्रॉड रोकथाम पर बढ़ते खर्च को देखते हुए अब सरकार चाहती है कि सिस्टम को धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनाया जाए, और इसी सोच के तहत बड़े मूल्य के मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर सीमित MDR वापस लाया जा रहा है।
आम जनता के लिए क्या बदला?
सबसे पहली और सबसे राहत की बात यह है कि व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) भेजे जाने वाले पैसे – जैसे दोस्तों या परिवार को पैसे भेजना – किसी भी राशि पर पूरी तरह मुफ्त बने रहेंगे। इस पर कोई चार्ज नहीं लगेगा, चाहे रकम कितनी भी बड़ी क्यों न हो।
जहां तक दुकानों या व्यापारियों को किए जाने वाले भुगतान की बात है:
₹2,000 से कम के पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। चाय, सब्ज़ी, ऑटो किराया जैसे रोज़मर्रा के छोटे भुगतान पहले की तरह पूरी तरह फ्री रहेंगे।
₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर सीधे ग्राहक से कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा, क्योंकि MDR कानूनी रूप से दुकानदार पर लागू होता है, ग्राहक पर नहीं। हालांकि अगर कोई मर्चेंट अपनी कीमतों में यह लागत जोड़ देता है, तो ग्राहक को परोक्ष रूप से थोड़ा असर महसूस हो सकता है। इसलिए आम जनता को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उनकी अधिकतर रोजमर्रा की खरीदारी ₹2,000 से कम की ही होती है।
दुकानदारों के लिए क्या बदला?
असली बदलाव उन दुकानदारों के लिए है जो ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट स्वीकार करते हैं:
MDR कटौती: ₹2,000 से ऊपर के हर मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% की दर से MDR कटेगा। यह राशि सीधे दुकानदार के बैंक खाते से काटी जाएगी, न कि ग्राहक की पेमेंट में जोड़ी जाएगी।
अधिकतम सीमा (कैप): राहत की बात यह है कि ₹75,000 या उससे ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर भी MDR अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजेक्शन तक ही सीमित रहेगा, यानी बहुत बड़े भुगतान पर भी दुकानदार पर असीमित बोझ नहीं पड़ेगा।
छोटे दुकानदारों को राहत: छोटे और लघु व्यापारियों को इस नए MDR ढांचे से बाहर रखा गया है, यानी सिर्फ बड़े और मध्यम आकार के मर्चेंट्स पर ही यह शुल्क लागू होगा। इससे रेहड़ी-पटरी वालों और छोटी दुकानों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
इंडस्ट्री के अनुमान के अनुसार, कुल UPI ट्रांजेक्शन में से केवल लगभग 4% ही ₹2,000 से ऊपर के होते हैं, लेकिन मूल्य के हिसाब से यह करीब 70% हिस्सा बनाते हैं। यही वजह है कि सरकार ने बड़े मूल्य के ट्रांजेक्शन को ही MDR के दायरे में रखने का फैसला किया है, ताकि ज्यादातर आम उपयोगकर्ता और छोटे व्यापारी इससे अप्रभावित रहें।
सरकार यह कदम क्यों उठा रही है?
पिछले कुछ वर्षों में UPI का इस्तेमाल इतनी तेजी से बढ़ा है कि अगस्त 2026 में ही NPCI के आंकड़ों के मुताबिक करीब 24.51 अरब ट्रांजेक्शन दर्ज किए गए। इतने बड़े पैमाने के सिस्टम को सुरक्षित, तेज और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए भारी निवेश की जरूरत होती है – चाहे वह सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर हो, साइबर सुरक्षा हो या फ्रॉड की रोकथाम। अब तक सरकार यह पूरा खर्च सब्सिडी के रूप में उठाती आई है, लेकिन बढ़ते वॉल्यूम के साथ यह मॉडल लंबे समय तक टिकाऊ रहना मुश्किल है। इसलिए सरकार बड़े मूल्य के मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर एक नाममात्र शुल्क लगाकर सिस्टम के लिए एक टिकाऊ राजस्व मॉडल बनाना चाहती है, जबकि आम उपयोगकर्ताओं और छोटे व्यापारियों के लिए UPI को पूरी तरह मुफ्त बनाए रखना चाहती है।
बात का सार
संक्षेप में कहें तो UPI New Rules 2026 का मकसद आम आदमी की जेब पर बोझ डालना नहीं, बल्कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लंबे समय तक सुरक्षित और मजबूत बनाए रखना है। ₹2,000 से कम के सभी भुगतान, चाहे वे किसी दुकानदार को किए जाएं या किसी व्यक्ति को, पूरी तरह मुफ्त बने रहेंगे। दोस्तों-परिवार को भेजे जाने वाले पैसों पर कभी कोई चार्ज नहीं लगेगा। नया 0.4% MDR सिर्फ बड़े मूल्य (₹2,000 से ऊपर) के मर्चेंट पेमेंट पर लागू होगा, वह भी सीधे दुकानदार के खाते से, और ₹300 की अधिकतम सीमा के साथ। इसलिए आम जनता को घबराने की जरूरत नहीं है – उनकी रोजमर्रा की छोटी-मोटी डिजिटल पेमेंट्स पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगी। हां, बड़े दुकानदारों और व्यापारियों को जरूर अपने कैश-फ्लो और प्राइसिंग की थोड़ी समीक्षा करनी पड़ सकती है, क्योंकि यह नया नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू हो रहा है।
Written By- Shivangi Pandey
“SRRO works as an implementation partner for CSR and social impact projects”


