खिचड़ीपुर में 800 से ज़्यादा लोगों तक पहुँची रोशनी

भूमिका: जब सेवा घर के पास पहुँचे

हम अक्सर आँखों की तकलीफ़ को “बाद में दिखा लेंगे” कहकर टाल देते हैं। कभी समय की कमी होती है, कभी अस्पताल दूर होता है और कभी जाँच करवाने का खर्च रोक देता है। नतीजा यह होता है कि छोटी-सी परेशानी धीरे-धीरे बड़ी बन जाती है। इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए सोशल रिफॉर्म्स एंड रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (SRRO) ने तय किया कि जाँच की सुविधा लोगों के पास पहुँचाई जाए, ताकि उन्हें उसके पास जाना न पड़े। इसी सोच का एक और सुंदर उदाहरण 11 अक्टूबर को खिचड़ीपुर में देखने को मिला।

“विज़न फॉर ऑल” का दूसरा पड़ाव

“विज़न फॉर ऑल” SRRO की वह पहल है, जिसके तहत निःशुल्क नेत्र जाँच एवं चश्मा वितरण शिविर आयोजित किए जाते हैं। तहिरपुर में पहले शिविर को मिली शानदार सफलता के बाद अब बारी थी दूसरे पड़ाव की। इस बार हमारी टीम पूर्वी दिल्ली के खिचड़ीपुर इलाके में पहुँची, जहाँ स्थानीय लोगों को इस सुविधा की ज़रूरत थी।

खिचड़ीपुर: जहाँ सुविधा अपने मोहल्ले में मिली

यह शिविर रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को श्री राजभान एंटरप्राइज़ेज़, 24 खिचड़ीपुर, एक्सेलसियर स्कूल के पास, मयूर विहार फेज़-2 में लगा। सुबह 11:00 बजे से शिविर की शुरुआत हुई और देखते ही देखते आसपास के लोग पहुँचने लगे। का दिन होने के कारण कई परिवार भी अपने बुज़ुर्गों और बच्चों के साथ आए। सबसे अच्छी बात यह रही कि शिविर इलाके के बीचोंबीच था। इसलिए लोगों को दूर यात्रा नहीं करनी पड़ी और वे अपने घर के पास ही जाँच करवा सके।

शिविर का उद्देश्य

यहाँ हमारा मुख्य लक्ष्य था कि आसपास के समुदाय को आँखों की बुनियादी देखभाल उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ हमने कुछ और बातों पर भी ध्यान दिया:

  • लोगों को नियमित रूप से आँखों की जाँच के लिए प्रेरित करना।
  • पास की और दूर की नज़र की कमज़ोरी पहचानना।
  • नज़र के संभावित दोषों का पता लगाना।
  • ज़रूरतमंदों को चश्मा उपलब्ध कराना।
  • आँखों को स्वस्थ रखने के आसान उपाय बताना।
  • ज़रूरत पड़ने पर आगे के परामर्श के लिए मार्गदर्शन देना।

शिविर में क्या-क्या सुविधाएँ मिलीं?

इस शिविर में आने वाले हर व्यक्ति को कई तरह की सेवाएँ एक ही स्थान पर मिलीं। इनमें शामिल थीं:

  • बुनियादी नेत्र जाँच: आँखों की सामान्य स्थिति की जाँच।
  • नज़र की जाँच: पास और दूर, दोनों तरह की दृष्टि का परीक्षण।
  • आई-चार्ट आकलन: चार्ट के आधार पर दृष्टि की स्पष्टता की पहचान।
  • दृष्टि दोष की स्क्रीनिंग: चश्मे की ज़रूरत वाले दोषों की जाँच।
  • चश्मा सहायता: जिन्हें ज़रूरत थी, उन्हें चश्मे के लिए मार्गदर्शन और सहयोग।
  • आगे की सलाह: आवश्यकता होने पर आगे इलाज के लिए परामर्श।

जाँच की प्रक्रिया: सरल और व्यवस्थित

शिविर की एक ख़ास बात उसकी व्यवस्था थी। सबसे पहले, लोगों को पंजीकरण स्थल तक पहुँचाया गया। इसके बाद उनकी बुनियादी जानकारी और आँखों से जुड़ी परेशानियाँ दर्ज की गईं। फिर, हर व्यक्ति की पास और दूर की नज़र की जाँच हुई। जाँच के नतीजों को देखकर यह समझा गया कि किसे कौन-सी दिक्कत हो सकती है। उसके बाद जिन्हें चश्मे की ज़रूरत थी, उन्हें उसी हिसाब से मार्गदर्शन दिया गया। अंत में, सभी लाभार्थियों को आँखों की देखभाल की जानकारी और आगे की सलाह भी दी गई। इस तरह पूरी प्रक्रिया बिना भीड़-भाड़ की उलझन के आगे बढ़ती रही।

800 से ज़्यादा लोगों को मिला लाभ

इस शिविर की सबसे बड़ी उपलब्धि रही लोगों की भागीदारी। 800 से ज़्यादा लोगों ने अपनी आँखों की जाँच करवाई, और यह संख्या बताती है कि इलाके में ऐसी सुविधा की कितनी ज़रूरत थी। जिन्हें चश्मे की ज़रूरत थी, उन्हें मार्गदर्शन और सहयोग मिला, और बाकी सभी को आँखों की देखभाल की उपयोगी सलाह दी गई।

जागरूकता: आँखों की देखभाल की सीख

जाँच के साथ-साथ हमने जागरूकता पर भी उतना ही ज़ोर दिया। कई बार धुँधला दिखना, पढ़ने में परेशानी होना, आँखों पर ज़ोर पड़ना या चीज़ें साफ़ न दिखना जैसे लक्षण हम नज़रअंदाज़ कर देते हैं। इसलिए हमारी टीम ने लोगों को समझाया कि ऐसे संकेत मिलते ही जाँच करवानी चाहिए। इसके अलावा, यह भी बताया गया कि नियमित जाँच से नज़र की समस्याएँ शुरुआती अवस्था में ही पकड़ में आ जाती हैं। जिन्हें चश्मा सुझाया गया, उन्हें डॉक्टरी सलाह मानने और चश्मे का सही उपयोग करने की सीख भी दी गई।

संदेश जो दिल तक पहुँचा

शिविर के पोस्टर पर लिखा संदेश इस पूरी पहल का सार था: “स्वस्थ आँखें, बेहतर दृष्टि, बेहतर जीवन।” यह केवल एक पंक्ति नहीं है, बल्कि हमारा संकल्प भी है। जब किसी की नज़र साफ़ होती है, तो वह पढ़ सकता है, काम कर सकता है और अपने परिवार के साथ दुनिया को बेहतर ढंग से देख पाता है। इसलिए आँखों की सुरक्षा सीधे जीवन की गुणवत्ता से जुड़ी है।

टीम की मेहनत और आभार

यह शिविर टीमवर्क का बेहतरीन उदाहरण रहा। हमारे वॉलंटियर्स ने पंजीकरण, मार्गदर्शन और व्यवस्था में दिन भर पूरी लगन से काम किया। मेडिकल टीम ने धैर्य के साथ हर व्यक्ति की जाँच की और सही सलाह दी। हम श्री राजभान एंटरप्राइज़ेज़ का विशेष धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने अपना स्थान उपलब्ध कराकर इस आयोजन को संभव बनाया। साथ ही, उन सभी स्थानीय लोगों का भी आभार, जिन्होंने शिविर में आकर इस पहल पर भरोसा जताया।

निष्कर्ष: एक कदम और, रोशनी की ओर

खिचड़ीपुर का यह शिविर हमें याद दिलाता है कि छोटी-सी पहल भी बड़ा बदलाव ला सकती है, बशर्ते वह सही लोगों तक पहुँचे। SRRO आगे भी इसी तरह समाज के हर वर्ग तक पहुँचने की कोशिश करता रहेगा। आप भी अपनी आँखों की नियमित जाँच करवाइए और अपने परिवार को भी प्रेरित कीजिए। यदि आप इस नेक अभियान से जुड़ना चाहते हैं, तो हमारी वेबसाइट www.srro.in पर संपर्क कर सकते हैं। आइए, मिलकर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी धुँधली नज़र के साथ जीने को मजबूर न हो।

Written by – Shivangi Pandey

“SRRO works as an implementation partner for CSR and social impact projects”

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