स्कूल में आँखों की जाँच: जब साफ़ नज़र बनी बेहतर पढ़ाई की पहली सीढ़ी
भूमिका: पढ़ाई की नींव, साफ़ नज़र
किसी बच्चे की पढ़ाई में कमज़ोरी दिखे, तो हम अक्सर उसकी मेहनत या ध्यान पर सवाल उठाते हैं। लेकिन कई बार असली वजह कहीं और होती है। हो सकता है कि बच्चे को ब्लैकबोर्ड साफ़ न दिखता हो या किताब के अक्षर धुँधले नज़र आते हों। छोटे बच्चे अपनी इस परेशानी को खुद समझ नहीं पाते, इसलिए वे चुप रहते हैं। यही सोचकर सोशल रिफॉर्म्स एंड रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (SRRO) ने तय किया कि बच्चों की आँखों की जाँच सीधे उनके स्कूल में की जाए।

“विज़न फॉर ऑल” का चौथा पड़ाव
“विज़न फॉर ऑल” SRRO की वह पहल है, जिसके तहत पाँच निःशुल्क नेत्र जाँच एवं चश्मा वितरण शिविरों की श्रृंखला चलाई गई। तहिरपुर, खिचड़ीपुर और ग्रेटर कैलाश के बाद चौथा पड़ाव बच्चों के नाम रहा। यह शिविर मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को एमसीडी प्रतिभा विद्यालय, बी-ब्लॉक, कालकाजी, नई दिल्ली-110019 में लगा। स्कूल कालकाजी मेट्रो स्टेशन के पास स्थित है, इसलिए यहाँ पहुँचना भी आसान रहा।

शिविर के लिए स्कूल क्यों चुना?
स्कूल बच्चों की दुनिया का सबसे बड़ा हिस्सा होता है। यहाँ जाँच करने का सबसे बड़ा फ़ायदा यह था कि बच्चे स्कूल के समय में ही आसानी से हिस्सा ले सके। उन्हें अलग से किसी अस्पताल या क्लिनिक जाने की ज़रूरत नहीं पड़ी। इसके अलावा, जाना-पहचाना माहौल होने के कारण बच्चे सहज महसूस करते रहे। वे डरे बिना जाँच करवा सके और पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से चलती रही।
शिविर का उद्देश्य
इस शिविर का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनके स्कूल परिसर में ही आँखों की बुनियादी जाँच उपलब्ध कराना था। इसके साथ हमने कुछ ख़ास लक्ष्य भी तय किए थे:
- बच्चों की पास और दूर की नज़र की जाँच करना।
- नज़र के संभावित दोषों की पहचान करना।
- ऐसे बच्चों को ढूँढना जिन्हें बोर्ड देखने या किताब पढ़ने में दिक्कत होती है।
- ज़रूरत होने पर चश्मे के बारे में मार्गदर्शन देना।
- आँखों की अच्छी आदतों के प्रति जागरूकता फैलाना।
- बच्चों को प्रेरित करना कि कोई परेशानी हो तो वे माता-पिता या शिक्षकों को बताएँ।
बच्चों को क्या-क्या सुविधाएँ मिलीं?
शिविर में विद्यार्थियों को एक ही जगह कई तरह की सेवाएँ उपलब्ध कराई गईं। इनमें शामिल थीं:
- पंजीकरण: हर बच्चे की बुनियादी जानकारी दर्ज करना।
- नज़र की जाँच: पास और दूर की दृष्टि का परीक्षण।
- आई-चार्ट स्क्रीनिंग: चार्ट के आधार पर नज़र की स्पष्टता की पहचान।
- बुनियादी नेत्र परीक्षण: आँखों की सामान्य जाँच।
- समस्या की पहचान: नज़र से जुड़ी संभावित दिक्कतों का पता लगाना।
- चश्मा मार्गदर्शन: जिन बच्चों को ज़रूरत थी, उन्हें सही सलाह।
- देखभाल के निर्देश: आँखों को स्वस्थ रखने के आसान तरीके।
जाँच की प्रक्रिया: क्रमबद्ध और बच्चों के अनुकूल
शिविर की सबसे अच्छी बात उसकी व्यवस्था थी। सबसे पहले, बच्चों को छोटे-छोटे समूहों में पंजीकरण और जाँच के लिए बुलाया गया। इसके बाद, उचित तरीकों से हर बच्चे की पास और दूर की नज़र जाँची गई। फिर, जिन बच्चों को जाँच के दौरान दिक्कत आई, उनके नाम आगे के मार्गदर्शन के लिए दर्ज किए गए। अंत में, उन्हें चश्मे या अतिरिक्त परामर्श की ज़रूरत के बारे में बताया गया। इस क्रम की वजह से न तो अव्यवस्था हुई और न ही किसी बच्चे को लंबा इंतज़ार करना पड़ा।
विद्यार्थियों के लिए यह जाँच क्यों ज़रूरी है?
नज़र की कमज़ोरी बच्चे की पढ़ाई पर सीधा असर डालती है। वह किताब पढ़ने, ठीक से लिखने और कक्षा में बोर्ड देखने में पिछड़ने लगता है। नतीजतन, उसका आत्मविश्वास भी घटता है। इसलिए शुरुआती जाँच बहुत मायने रखती है, क्योंकि इससे ऐसी दिक्कतें पढ़ाई पर असर डालने से पहले ही पकड़ में आ जाती हैं। साथ ही, शिविर में बच्चों को कुछ आसान आदतें अपनाने की सीख दी गई:
- पढ़ते समय आँखों और किताब के बीच सही दूरी रखें।
- मोबाइल और टीवी जैसी स्क्रीन का ज़्यादा इस्तेमाल न करें।
- धुँधला दिखने या असहजता होने पर बड़ों को ज़रूर बताएँ।
मुस्कानों से भरा माहौल
शिविर के दौरान स्कूल का माहौल बेहद उत्साह भरा रहा। एक तरफ़ डॉक्टर मशीन और चार्ट की मदद से बच्चों की नज़र जाँच रहे थे, तो दूसरी तरफ़ वॉलंटियर्स उनके नाम और जानकारी दर्ज कर रहे थे। जाँच के बाद बच्चे “विज़न फॉर ऑल” के बैग के साथ खुशी-खुशी तस्वीरें खिंचवाते नज़र आए। उनकी मुस्कान बता रही थी कि इस पहल को उन्होंने दिल से अपनाया। ऐसे पल हमारी पूरी मेहनत का सबसे सुंदर इनाम होते हैं।
शिविर का परिणाम
इस शिविर से एमसीडी प्रतिभा विद्यालय के विद्यार्थियों की नज़र का आकलन हो सका। साथ ही, उन बच्चों की पहचान हुई जिन्हें सुधारात्मक सहायता की ज़रूरत पड़ सकती है। इसके अलावा, बच्चों में अपनी आँखों की सुरक्षा के महत्व के बारे में जागरूकता भी बढ़ी, जो आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी पूँजी बनेगी।
आभार
यह शिविर सामूहिक सहयोग का परिणाम रहा। हम एमसीडी प्रतिभा विद्यालय के प्रशासन और शिक्षकों का हार्दिक धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने हमें स्कूल में शिविर लगाने की अनुमति दी और पूरे समय सहयोग किया। मेडिकल टीम और हमारे वॉलंटियर्स ने भी पूरे समर्पण से अपनी ज़िम्मेदारी निभाई। सबसे बढ़कर, उन सभी बच्चों का आभार, जिन्होंने अनुशासन और उत्साह के साथ जाँच में भाग लिया।
निष्कर्ष: स्वस्थ आँखें, बेहतर दृष्टि, बेहतर शिक्षा
कालकाजी का यह शिविर हमें याद दिलाता है कि बच्चों का भविष्य संवारने के लिए सबसे पहले उनकी नज़र का ख़याल रखना ज़रूरी है। स्वस्थ आँखें बेहतर दृष्टि देती हैं और बेहतर दृष्टि से ही बेहतर शिक्षा संभव होती है। SRRO आगे भी इसी तरह बच्चों और समाज के हर वर्ग तक पहुँचता रहेगा। यदि आप इस नेक अभियान से जुड़ना चाहते हैं, तो हमारी वेबसाइट www.srro.in पर संपर्क कर सकते हैं। आइए, मिलकर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी बच्चा धुँधली नज़र की वजह से पढ़ाई में पीछे न रह जाए।
Written By – Shivangi Pandey
“SRRO works as an implementation partner for CSR and social impact projects”


