12 अक्टूबर 2026, एन-107, ग्रेटर कैलाश पार्ट-1, नई दिल्ली
ग्रेटर कैलाश में आँखों की जाँच: जब नज़र की फ़िक्र पहुँची आपके दरवाज़े तक
भूमिका: आँखें अनमोल, फिर भी अनदेखी
आँखें हमारे शरीर का सबसे नाज़ुक और सबसे कीमती हिस्सा हैं। पढ़ना, काम करना, सफ़र करना या परिवार के साथ समय बिताना, हर काम में नज़र की ज़रूरत पड़ती है। फिर भी हम अक्सर आँखों की जाँच को टालते रहते हैं। कभी जानकारी की कमी होती है, कभी समय नहीं मिलता और कभी स्वास्थ्य सुविधा तक पहुँचना मुश्किल लगता है। इसी आदत को बदलने के लिए सोशल रिफॉर्म्स एंड रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (SRRO) लगातार प्रयास कर रहा है। उसी कड़ी में 12 अक्टूबर को ग्रेटर कैलाश में एक और शिविर आयोजित हुआ।
“विज़न फॉर ऑल” का तीसरा पड़ाव
“विज़न फॉर ऑल” SRRO की वह पहल है, जिसके तहत पाँच निःशुल्क नेत्र जाँच एवं चश्मा वितरण शिविरों की श्रृंखला चलाई गई। तहिरपुर और खिचड़ीपुर के सफल शिविरों के बाद अब तीसरे पड़ाव की बारी थी। इस बार हमारी टीम दक्षिण दिल्ली के ग्रेटर कैलाश पहुँची। शिविर का आयोजन एन-107, ग्रेटर कैलाश पार्ट-1, नई दिल्ली-110048 में हुआ। SRRO का मानना है कि स्वास्थ्य सेवा तभी सार्थक है, जब वह ज़रूरतमंद तक आसानी से पहुँचे। इसीलिए हमारी कोशिश रहती है कि शिविर लोगों के इलाके के बीच ही लगें, ताकि उन्हें ज़्यादा भागदौड़ न करनी पड़े।
ज़रूरत जो हमें यहाँ तक लाई
नज़र की कमज़ोरी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को कई तरह से प्रभावित करती है। पढ़ने में दिक्कत होती है, काम की गति धीमी पड़ती है और सफ़र करना भी जोखिम भरा हो सकता है। इसके बावजूद कई लोग इसे मामूली समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। इसलिए हमने सोचा कि जाँच की सुविधा उनके अपने इलाके में ही उपलब्ध कराई जाए। इस तरह लोगों को शुरुआती नेत्र जाँच और सही सलाह अपने ठिकाने के पास ही मिल सकी। साथ ही, उन लोगों की पहचान भी हो सकी जिन्हें चश्मे या आगे के चिकित्सकीय परामर्श की ज़रूरत थी।
शिविर का उद्देश्य
इस शिविर का मुख्य लक्ष्य था कि आँखों की बुनियादी देखभाल अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे और वे अपनी दृष्टि के प्रति सजग बनें। इसके लिए हमने कुछ ख़ास बिंदु तय किए थे:
पास की और दूर की नज़र की जाँच करना।
नज़र के संभावित दोषों की पहचान करना।
जिन्हें चश्मे की ज़रूरत है, उन्हें पहचानना।
आँखों की देखभाल की बुनियादी जानकारी देना।
नियमित जाँच के लिए प्रेरित करना।
ज़रूरत होने पर आगे के परामर्श के लिए भेजना।
शिविर की प्रक्रिया: योजनाबद्ध और सरल
शिविर को एक तय क्रम में चलाया गया ताकि हर व्यक्ति को सहजता से सेवा मिले। सबसे पहले, लाभार्थियों को पंजीकरण के लिए मार्गदर्शन दिया गया, जहाँ उनकी बुनियादी जानकारी और परेशानियाँ दर्ज की गईं। इसके बाद, पास और दूर की नज़र का आकलन किया गया। फिर, जिन लोगों को जाँच के दौरान दिक्कत महसूस हुई, उन्हें चश्मे या आगे के परामर्श के बारे में उचित सलाह दी गई। इस पूरी प्रक्रिया से हमारी टीम को प्रतिभागियों की ज़रूरतें समझने और उन्हें सही सहायता की ओर भेजने में मदद मिली।
जागरूकता: संकेत पहचानिए, सलाह मानिए
जाँच के साथ-साथ जागरूकता भी इस शिविर का अहम हिस्सा रही। हमारी टीम ने लोगों को नज़र की समस्या के आम संकेतों के बारे में बताया, जैसे धुँधला दिखना, पढ़ने में कठिनाई, आँखों पर ज़ोर पड़ना और सिरदर्द। इसके अलावा, लाभार्थियों को कुछ ज़रूरी बातें अपनाने के लिए प्रेरित किया गया:
अपनी आँखों की नियमित जाँच करवाएँ।
चश्मा सुझाया गया हो तो उसका उपयोग करें।
नज़र में आए बदलाव को नज़रअंदाज़ न करें।
आँखों की साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखें।
लक्षण बने रहें या बढ़ें तो डॉक्टर से सलाह लें।
दृश्य जो बहुत कुछ कह गए
शिविर के दौरान अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग जाँच के लिए पहुँचे। कहीं डॉक्टर ध्यान से किसी की नज़र परख रहे थे, तो कहीं वॉलंटियर्स पंजीकरण में मदद कर रहे थे। मशीन से होने वाली जाँच से लेकर चश्मे के आकलन तक, हर कोने में सेवा का माहौल था। लोग कतार में अपनी बारी का इंतज़ार करते दिखे और टीम हर किसी से शांति से बात कर रही थी। यही अपनापन किसी भी शिविर की असली पहचान होता है।
आयोजक और टीम का आभार
इस शिविर का समन्वय श्रीमती अर्चना अग्निहोत्री ने किया। उनकी सक्रिय भूमिका के कारण पूरा आयोजन सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। इसके साथ ही, मेडिकल टीम ने पूरे समर्पण के साथ हर व्यक्ति की जाँच की और वॉलंटियर्स ने व्यवस्था सँभालने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हम उन सभी लाभार्थियों का भी धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने शिविर में आकर इस पहल पर भरोसा जताया।
निष्कर्ष: स्वस्थ आँखें, बेहतर दृष्टि, बेहतर जीवन
ग्रेटर कैलाश का यह शिविर हमें याद दिलाता है कि आँखों की देखभाल कोई विलासिता नहीं, बल्कि बुनियादी ज़रूरत है। तीन शिविरों के बाद हमारा आत्मविश्वास और बढ़ा है। हर पड़ाव ने सिखाया कि जब सेवा घर के पास पहुँचती है, तो लोग खुद आगे आकर उसका लाभ उठाते हैं। SRRO आगे भी इसी तरह लोगों तक पहुँचता रहेगा। आप भी अपनी आँखों की नियमित जाँच करवाइए और अपने परिवार को भी इसके लिए प्रेरित कीजिए। यदि आप इस नेक अभियान से जुड़ना चाहते हैं, तो हमारी वेबसाइट www.srro.in पर संपर्क कर सकते हैं। आइए, मिलकर यह संकल्प लें कि कोई भी नज़र की परेशानी को अनदेखा न करे
Written By – Shivangi Pandey
“SRRO works as an implementation partner for CSR and social impact projects”


