बच्चों के साथ शिक्षकों की नज़र भी जाँची गई: विज़न फॉर ऑल का सफल समापन

भूमिका: सेवा का सफ़र, एक यादगार मुकाम पर
हर लंबे सफ़र का एक आख़िरी पड़ाव होता है, और वही पड़ाव अक्सर सबसे यादगार बन जाता है। सोशल रिफॉर्म्स एंड रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (SRRO) का “विज़न फॉर ऑल” अभियान भी 14 अक्टूबर 2026 को ऐसे ही मुकाम पर पहुँचा। पाँच शिविरों की इस श्रृंखला का आख़िरी शिविर कालकाजी के गिरि नगर में लगा। यहाँ भी हमारा लक्ष्य वही रहा: आँखों की देखभाल को हर उस व्यक्ति तक पहुँचाना, जिसे इसकी ज़रूरत है।
“विज़न फॉर ऑल” का पाँचवाँ पड़ाव
यह शिविर बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक एमसीडी प्राइमरी स्कूल, गिरि नगर, कालकाजी, नई दिल्ली-110019 में आयोजित हुआ। इस बार शिविर सिर्फ़ स्कूल के विद्यार्थियों और स्टाफ़ सदस्यों के लिए रखा गया था। इसकी वजह साफ़ थी। हम चाहते थे कि स्कूल के बच्चे और उन्हें पढ़ाने वाले, दोनों अपनी नज़र की जाँच एक ही जगह और सहज माहौल में करवा सकें।
उद्घाटन: एक शुभ शुरुआत
शिविर का उद्घाटन श्रीमती कंचन गर्ग ने किया, जो महामंत्री, भाजपा महिला मोर्चा, दक्षिण दिल्ली हैं। उनके उद्घाटन के साथ ही स्कूल में नेत्र जाँच की शुरुआत हुई। इस मौके पर स्कूल-आधारित निवारक स्वास्थ्य सेवा और बच्चों व स्कूल कर्मियों की नियमित नज़र जाँच के महत्व पर भी ज़ोर दिया गया।

शिविर का उद्देश्य
इस शिविर का मुख्य लक्ष्य एमसीडी प्राइमरी स्कूल के बच्चों और स्टाफ़ को स्कूल परिसर में ही समय पर आँखों की जाँच और सही सलाह उपलब्ध कराना था। इसके साथ हमने कुछ और बातें भी तय की थीं:
- विद्यार्थियों की पास और दूर की नज़र की जाँच करना।
- स्कूल स्टाफ़ में नज़र की आम समस्याओं की स्क्रीनिंग करना।
- नज़र के संभावित दोषों की पहचान करना।
- ज़रूरत होने पर चश्मे में सहयोग देना।
- आँखों की अच्छी आदतों के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
- बच्चों और स्टाफ़ को नियमित जाँच के लिए प्रेरित करना।
शिविर में क्या-क्या सुविधाएँ मिलीं?
शिविर में आने वाले हर विद्यार्थी और स्टाफ़ सदस्य को कई सेवाएँ एक ही जगह मिलीं। इनमें शामिल थीं:
- पंजीकरण: विद्यार्थियों और स्टाफ़ की जानकारी दर्ज करना।
- नज़र की जाँच: पास और दूर, दोनों तरह की दृष्टि का परीक्षण।
- आई-चार्ट स्क्रीनिंग: चार्ट के आधार पर नज़र की स्पष्टता की पहचान।
- बुनियादी नेत्र परीक्षण: आँखों की सामान्य जाँच।
- दृष्टि दोष की पहचान: चश्मे की ज़रूरत वाले दोषों का पता लगाना।
- चश्मा सुझाव या वितरण: जहाँ आवश्यक हुआ, वहाँ चश्मे का सुझाव या सहयोग।
- देखभाल की सलाह: बच्चों और स्टाफ़ के लिए आँखों की देखभाल का मार्गदर्शन।
- आगे की सलाह: ज़रूरत होने पर आगे परामर्श के लिए निर्देश।
जाँच की प्रक्रिया: व्यवस्थित और सरल
शिविर की पूरी व्यवस्था सुनियोजित रही। सबसे पहले, विद्यार्थियों और स्टाफ़ सदस्यों को पंजीकरण के लिए मार्गदर्शन दिया गया। इसके बाद, मेडिकल टीम ने पास और दूर की नज़र की जाँच की और हर प्रतिभागी की परेशानी को दर्ज किया। फिर, जिन्हें चश्मे या आगे के परामर्श की ज़रूरत थी, उन्हें उसी हिसाब से मार्गदर्शन मिला। अंत में, सभी को नियमित जाँच और आँखों की देखभाल के महत्व के बारे में बताया गया। इस तरह बिना किसी अव्यवस्था के जाँच पूरी हो सकी।
बच्चों के लिए यह जाँच क्यों ज़रूरी है?
साफ़ नज़र पढ़ने, लिखने और कक्षा की गतिविधियों में हिस्सा लेने की बुनियाद है। लेकिन छोटे बच्चे अक्सर अपनी तकलीफ़ को ठीक से बता नहीं पाते, इसलिए नज़र की कमज़ोरी कई बार किसी की नज़र में आ ही नहीं पाती। इस शिविर ने ऐसे बच्चों की पहचान में मदद की, जिन्हें बोर्ड देखने, किताब पढ़ने या पाठ पर ध्यान लगाने में दिक्कत हो सकती है। इसके अलावा, जब समस्या का पता शुरुआत में ही चल जाता है, तो बच्चे को सही सहायता समय पर मिल पाती है।
शिक्षकों और स्टाफ़ की जाँच भी उतनी ही अहम
अक्सर हम बच्चों की नज़र की बात करते हैं, पर पढ़ाने वालों की आँखों को भूल जाते हैं। इस शिविर की ख़ास बात यह थी कि स्कूल स्टाफ़ को भी जाँच में शामिल किया गया। उन्हें भी आँखों की सेहत और देखभाल के बारे में उपयोगी सलाह दी गई। जब शिक्षक की नज़र स्वस्थ रहती है, तब वे बेहतर ढंग से बच्चों का मार्गदर्शन कर पाते हैं।
पाँच शिविर, एक संकल्प
कालकाजी के इस शिविर के साथ “विज़न फॉर ऑल” की पाँच शिविरों की श्रृंखला पूरी हुई। तहिरपुर के कुष्ठ आश्रम से लेकर खिचड़ीपुर, ग्रेटर कैलाश और कालकाजी के स्कूलों तक, हमने 15 दिनों में दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में सेवा पहुँचाई। इस पूरी श्रृंखला में 1200 से ज़्यादा लोगों ने लाभ उठाया, जिनमें बच्चे भी शामिल थे। यह संख्या हमारे लिए सिर्फ़ गिनती नहीं, बल्कि इस बात का सबूत है कि जब सेवा लोगों के पास पहुँचती है, तो वे उसे दिल से अपनाते हैं।
आभार
इस सफलता में कई लोगों का योगदान रहा। हम एमसीडी प्राइमरी स्कूल के प्रशासन और शिक्षकों का हार्दिक धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने शिविर के लिए पूरा सहयोग दिया। उद्घाटन के लिए श्रीमती कंचन गर्ग के प्रति भी हम आभारी हैं। मेडिकल टीम, वॉलंटियर्स, स्टाफ़ सदस्यों और स्कूल के सभी बच्चों का भी विशेष धन्यवाद, जिनके उत्साह से यह शिविर सफल रहा।
निष्कर्ष: स्वस्थ आँखें, बेहतर दृष्टि, बेहतर शिक्षा
विज़न फॉर ऑल का यह समापन हमें एक नई शुरुआत का हौसला भी देता है। हमने सीखा कि छोटी-छोटी कोशिशें मिलकर बड़ा बदलाव बन जाती हैं। SRRO आगे भी इसी जज़्बे के साथ समाज के हर वर्ग तक पहुँचता रहेगा। आप भी अपनी और अपने बच्चों की आँखों की नियमित जाँच करवाइए। यदि आप इस नेक अभियान से जुड़ना चाहते हैं, तो हमारी वेबसाइट www.srro.in पर संपर्क कर सकते हैं। आइए, मिलकर यह सुनिश्चित करें कि हर बच्चे और हर इंसान को साफ़ देखने का हक़ मिले।
Written By – Shivangi Pandey
“SRRO works as an implementation partner for CSR and social impact projects”

