
जीते जी नेत्रदान: 400 से ज़्यादा ज़रूरतमंदों को मिली रोशनी
भूमिका: दान का एक अलग रूप
नेत्रदान को हम सब महादान मानते हैं, और यह सच भी है। मृत्यु के बाद दान की गई दो आँखें किसी और की ज़िंदगी में उजाला भर देती हैं। लेकिन क्या दान की यह भावना केवल जीवन के अंत तक रुकी रहनी चाहिए? हमारे NGO, सोशल रिफॉर्म्स एंड रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (SRRO), का मानना है कि नहीं। इसलिए हमने इस महादान को थोड़ा बदला और जीते जी करना शुरू किया। जब किसी ज़रूरतमंद की आँखों की जाँच मुफ़्त हो जाए और उसे चश्मा मिल जाए, तो उसकी दुनिया उसी पल बदल जाती है। यही हमारा जीते जी किया जाने वाला दान है।
“विज़न फॉर ऑल” की शुरुआत
इसी सोच से जन्म हुआ “विज़न फॉर ऑल” का। यह ONGC की CSR पहल है, जिसे SRRO ने ज़मीन पर उतारा है। इसके तहत 15 दिनों में दिल्ली के 5 अलग-अलग स्थानों पर निःशुल्क नेत्र जाँच एवं चश्मा वितरण शिविर लगाए गए। इन शिविरों का सीधा उद्देश्य था कि जिन लोगों तक आम तौर पर स्वास्थ्य सेवाएँ मुश्किल से पहुँचती हैं, उन तक हम खुद पहुँचें।
पहला पड़ाव: जय हिंद कुष्ठ आश्रम, तहिरपुर
इस अभियान का पहला शिविर 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार को लगा। स्थान था जय हिंद कुष्ठ आश्रम, तहिरपुर, दिल्ली, और समय सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक। शिविर का नाम “कैंप-1” रखा गया था, पर इसके पीछे की भावना किसी भी आयोजन से कहीं बड़ी थी। हमने जान-बूझकर शुरुआत यहीं से की, क्योंकि ऐसे आश्रमों में रहने वाले लोग अक्सर समाज की नज़र से दूर रह जाते हैं।
ज़रूरतमंदों का सैलाब
शिविर शुरू होते ही आश्रम और आसपास के लोग जुटने लगे। इनमें से ज़्यादातर आर्थिक रूप से बहुत कमज़ोर थे। सीमित साधनों में जीवन चला रहे इन लोगों के लिए निजी अस्पताल की महँगी जाँच, डॉक्टर की फ़ीस और चश्मे का खर्च उठाना आसान नहीं होता। इसलिए जब उन्हें अपने ही दरवाज़े पर यह सुविधा मिली, तो चेहरों पर राहत साफ़ दिखाई दे रही थी। कतार में खड़े हर व्यक्ति को सम्मान के साथ अपनी बारी का इंतज़ार करने का अवसर मिला। हमारी कोशिश यही थी कि कोई भी व्यक्ति जाँच या चश्मे के बिना वापस न लौटे, और हर किसी को अपनेपन का एहसास हो।
शिविर में क्या-क्या मिला?
शिविर में केवल जाँच तक सीमित नहीं रहा गया। हर लाभार्थी को एक पूरी प्रक्रिया से गुज़ारा गया, ताकि उसकी समस्या की सही पहचान हो सके और समाधान भी मिले। मुख्य सेवाएँ इस प्रकार थीं:
- नेत्र जाँच: मेडिकल टीम द्वारा आँखों की बुनियादी जाँच और स्क्रीनिंग।
- दृष्टि आकलन: यह पहचानना कि किसे चश्मे की ज़रूरत है और किस नंबर की।
- निःशुल्क चश्मे: आकलन के आधार पर पात्र लोगों को चश्मा उपलब्ध कराया गया।
- दवाइयाँ: ज़रूरत के अनुसार आँखों से जुड़ी दवाइयाँ मुफ़्त दी गईं।
- नेत्र-देखभाल की जानकारी: आँखों को स्वस्थ रखने के आसान उपाय बताए गए।
इसके अलावा हर लाभार्थी को “विज़न फॉर ऑल” का एक बैग भी दिया गया, जो इस पहल की एक छोटी-सी पहचान बन गया।

400 से ज़्यादा लोगों को मिला लाभ
इस शिविर की सबसे बड़ी उपलब्धि रही इसकी पहुँच। शिविर के दौरान 400 से ज़्यादा लोगों ने अपनी आँखों की जाँच करवाई। यह संख्या केवल एक आँकड़ा नहीं है। इसके पीछे 400 से ज़्यादा ऐसी कहानियाँ हैं, जिनमें किसी को धुँधला दिखाई देता था, किसी की नज़र बरसों से कमज़ोर थी और किसी के पास जाँच करवाने का कोई साधन ही नहीं था। अब इनमें से कई लोग साफ़ देख पाएँगे, और साफ़ देखना सीधे उनके आत्मविश्वास और रोज़मर्रा के कामों से जुड़ा है।
जागरूकता भी उतनी ही ज़रूरी
इलाज के साथ-साथ हमने जागरूकता पर भी ध्यान दिया। कई बार लोग आँखों की छोटी-सी तकलीफ़ को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, और वही आगे चलकर बड़ी समस्या बन जाती है। इसलिए हमारी टीम ने समझाया कि नियमित जाँच क्यों ज़रूरी है और बचाव के लिए क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए। साथ ही, लोगों को नेत्रदान के महत्व के बारे में भी बताया गया। हमारा विश्वास है कि जो व्यक्ति आँखों की कीमत समझ लेता है, वही आगे दूसरों की रोशनी के बारे में भी सोचता है।
टीम की मेहनत और आभार
यह सफलता किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरी टीम की है। हमारे वॉलंटियर्स ने पंजीकरण से लेकर जाँच, चश्मा वितरण और मार्गदर्शन तक हर जगह पूरे समर्पण से काम किया। मेडिकल टीम ने धैर्य के साथ हर व्यक्ति की जाँच की। हम ONGC के प्रति दिल से आभार व्यक्त करते हैं, जिनकी CSR पहल ने इस अभियान को संभव बनाया। साथ ही, जय हिंद कुष्ठ आश्रम के प्रबंधन और सभी निवासियों का भी धन्यवाद, जिन्होंने हम पर भरोसा किया।
निष्कर्ष: जीते जी दान ही सच्चा संकल्प
कैंप-1 ने हमें यह सिखाया कि बदलाव लाने के लिए बड़े मंच की नहीं, बस सही नीयत और सही जगह पहुँचने की ज़रूरत होती है। नेत्रदान महादान है, और हम सबको इसका संकल्प ज़रूर लेना चाहिए। पर यह भी याद रखिए कि आज किसी की आँखों की जाँच करवा देना, किसी को चश्मा दिला देना भी उतना ही बड़ा पुण्य है। इस पहले शिविर की सफलता ने हमारा हौसला कई गुना बढ़ा दिया है, और आगे के शिविरों के लिए हमें नई ऊर्जा दी है। SRRO आगे भी इसी तरह ज़रूरतमंदों तक पहुँचता रहेगा। यदि आप भी इस नेक काम से जुड़ना चाहते हैं, तो हमारी वेबसाइट www.srro.in पर संपर्क कर सकते हैं। आइए, मिलकर कोशिश करें कि कोई भी व्यक्ति रोशनी से वंचित न रहे।
Written By- Shivangi Pandey
“SRRO works as an implementation partner for CSR and social impact projects”

