अस्तित्व – आपकी सेहत, आपकी पहचान: धूम्रपान मुक्त भविष्य

परिचय –

आज के आधुनिक और प्रगतिशील समाज में जहां महिलाओं ने शिक्षा, करियर और हर सामाजिक क्षेत्र में अपनी सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ बेहद चिंताजनक प्रवृत्तियां भी तेजी से उभरकर सामने आई हैं। ये प्रवृत्तियां न केवल उनके व्यक्तिगत स्वास्थ्य बल्कि पूरे समाज के भविष्य पर गहरा आघात कर रही हैं। इसी संवेदनशील और गंभीर विषय पर प्रकाश डालने के लिए सोशल रिफॉर्म्स एंड रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (SRRO) द्वारा हाल ही में एक व्यापक सामाजिक जागरूकता एवं जनमत सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की गई है, जिसका शीर्षक है — “अस्तित्व: आपकी सेहत, आपकी पहचान – धूम्रपान मुक्त भविष्य”।
इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य समाज की युवतियों और महिलाओं में लगातार बढ़ रही धूम्रपान (Smoking) की आदत के पीछे छिपे वास्तविक कारणों को गहराई से समझना, उनके स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभावों का आकलन करना और इस लत से छुटकारा पाने के रास्तों की तलाश करना है। इसके परिणामस्वरूप, जो आंकड़े और तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और आंखें खोलने वाले हैं। आइए, इस सर्वे रिपोर्ट के सभी 5 प्रमुख पहलुओं (मीडिया इमेजेस के आंकड़ों के आधार पर) को विस्तार से समझते हैं।

सर्वे रिपोर्ट के 5 मुख्य बिंदु-

1. युवतियों में धूम्रपान की शुरुआत के मुख्य कारण

सर्वेक्षण के आंकड़ों से यह साफ जाहिर होता है कि युवतियों में धूम्रपान की आदत अचानक नहीं पनपती, बल्कि इसके पीछे कई मजबूत बाहरी और मानसिक कारक काम कर रहे हैं।
इसके तहत, सबसे बड़ा कारण सोशल मीडिया, फिल्मों और डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स का प्रभाव (41.7%) निकलकर सामने आया है। ऑन-स्क्रीन किरदारों को स्मोकिंग करते देख युवा लड़कियां इसे एक ‘कूल’ लाइफस्टाइल का हिस्सा मानने लगती हैं।
इसके अलावा, 19.4% लड़कियां अपने मित्र समूह (Peer Pressure) के साथ तालमेल बिठाने के लिए इसकी शुरुआत करती हैं।
साथ ही, 19.4% युवतियां मानसिक तनाव और आधुनिक जीवनशैली के दबाव के कारण और बची हुई 19.4% लड़कियां आधुनिकता व सामाजिक प्रभाव की गलत धारणा के चलते इस दलदल में कदम रखती हैं।

2. महिलाओं के स्वास्थ्य पर धूम्रपान का गंभीर प्रभाव

धूम्रपान का सेवन पुरुषों की तुलना में महिलाओं के जैविक और शारीरिक तंत्र पर कहीं अधिक विनाशकारी प्रभाव डालता है। जब लोगों से महिलाओं के स्वास्थ्य पर इसके असर के बारे में पूछा गया, तो जनता ने इस पर भारी चिंता व्यक्त की।
विशेष रूप से, 75% लोगों का मानना है कि इसके सभी दुष्प्रभाव बेहद गंभीर हैं, जिसमें शारीरिक और मानसिक दोनों स्वास्थ्य शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, 16.7% लोगों ने स्पष्ट किया कि यह महिलाओं की प्रजनन क्षमता (Fertility) और हार्मोनल संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ देता है। धूम्रपान के कारण आज की युवतियों में PCOS, अनियमित पीरियड्स और गर्भधारण में आने वाली जटिलताएं तेजी से बढ़ रही हैं।

3. धूम्रपान की लत को सामान्य मानने के पीछे की मानसिकता

आज के समय में समाज का एक बड़ा हिस्सा महिलाओं द्वारा धूम्रपान किए जाने को आधुनिकता से जोड़कर सामान्य (Normalize) मानने लगा है। सर्वे में इस खतरनाक मानसिकता को बदलने और लड़कियों को जागरूक करने के उपायों पर राय मांगी गई।
इसके जवाब में, सबसे बड़ा जनमत आत्म-सशक्तिकरण और सकारात्मक जीवनशैली (36.1%) के पक्ष में रहा। लोगों का मानना है कि यदि लड़कियों को मानसिक रूप से मजबूत और एक स्वस्थ जीवनशैली के प्रति प्रेरित किया जाए, तो वे इस लत से दूर रहेंगी।
इसके साथ ही, 30.6% लोगों ने महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम चलाने की वकालत की। वहीं, 19.4% लोग सार्वजनिक स्थानों पर सख्त नियम और दंड व्यवस्था लागू करने के पक्ष में दिखे, जबकि 13.9% लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि तंबाकू विज्ञापनों और उनके ग्लैमराइजेशन पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए।

 

4. धूम्रपान छोड़ने की राह में आने वाली मुख्य बाधाएं

ज्यादातर युवतियां धूम्रपान के खतरों को जानने के बाद इसे छोड़ना तो चाहती हैं, लेकिन कुछ ऐसी मानसिक और सामाजिक कड़ियां हैं जो उन्हें इस लत से बाहर नहीं निकलने देतीं।
आंकड़ों के अनुसार, धूम्रपान न छोड़ पाने की सबसे बड़ी वजह आत्म-नियंत्रण और दृढ़ इच्छाशक्ति की कमी (38.9%) पाई गई है।
हालांकि, इसके ठीक बाद दूसरा सबसे बड़ा कारण धूम्रपान की तीव्र लत या निकोटीन एडिक्शन (36.1%) है, जो इंसान को शारीरिक रूप से अपना गुलाम बना लेता है।
इसके अलावा, 19.4% युवतियां मानसिक तनाव और भावनात्मक समस्याओं से घिरे होने के कारण इस लत को नहीं छोड़ पातीं, क्योंकि वे इसे ही अपने तनाव का एकमात्र हल मान बैठती हैं।

 

5. इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए जनता द्वारा सुझाए गए प्रभावी उपाय

इस सामाजिक बुराई को जड़ से समाप्त करने के लिए सर्वेक्षण में शामिल जनता ने अत्यंत व्यावहारिक और महत्वपूर्ण उपाय साझा किए हैं।
संक्षेप में कहें तो, सबसे ज्यादा 33.3% लोगों का मानना है कि परिवार के भीतर खुला संवाद और भावनात्मक सहयोग सबसे जरूरी है। जब माता-पिता अपनी बेटियों से खुलकर बात करेंगे और उनकी मानसिक स्थिति को समझेंगे, तो बच्चों को किसी गलत सहारे की जरूरत नहीं होगी।
इसके साथ ही, 27.8% लोगों ने नियमित स्वास्थ्य और जागरूकता अभियानों को जरूरी बताया।
कानून और नीतियों के स्तर पर, 19.4% लोग तंबाकू उत्पादों पर सख्त नियंत्रण व उनकी कीमतें बढ़ाने के पक्ष में हैं, जबकि अन्य 19.4% लोग फिल्मों और डिजिटल मीडिया में धूम्रपान के दृश्यों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग करते हैं।

जनता की राय और समीक्षाएं

इस सर्वेक्षण के दौरान अनेक लोगों ने इस विषय पर अपने व्यक्तिगत विचार, सुझाव एवं अनुभव साझा किए। प्राप्त प्रतिक्रियाओं से समाज की सोच, चिंताओं और जागरूकता के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर मिला:
आधुनिकता और बराबरी की गलत धारणा: कई उत्तरदाताओं का मानना है कि आजकल युवतियों में पुरुषों के बराबर दिखने की चाह को गलत दिशा में ले जाया जा रहा है। पुरुषों की अच्छी आदतों के बजाय धूम्रपान जैसी हानिकारक आदतों को अपनाकर इसे ‘आधुनिकता का प्रतीक’ मान लिया गया है, जो कि सरासर गलत है।

1. सिगरेट उत्पादों पर ‘एज लिमिट’ बढ़ाना: कई युवाओं का सुझाव है कि धूम्रपान को रोकने के लिए सरकार को तंबाकू और स्मोकिंग प्रोडक्ट्स को खरीदने की उम्र सीमा (Age Limit) को काफी बढ़ा देना चाहिए।

2. सिनेमा और विज्ञापनों पर सख्त पाबंदी: उत्तरदाताओं के अनुसार, फिल्मों, टीवी शो, वेब सीरीज और विज्ञापनों में जिस तरह धूम्रपान का महिमामंडन किया जाता है, उस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए क्योंकि यह युवा पीढ़ी को सीधे तौर पर बिगाड़ रहा है।

3. फेमिनिज्म की गलत समझ (Lack of Understanding of Modern Feminism): एक समीक्षा में यह बात सामने आई कि भारतीय विज्ञापनों, टीवी और एंटरटेनमेंट सेक्टर के चलते आधुनिक फेमिनिज्म (Modern Feminism) की समझ को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है, जिससे युवतियां नशे को आजादी का रूप समझ बैठती हैं।

4. आत्म-नियंत्रण (Self-Control) ही सबसे बड़ा समाधान: सर्वेक्षण में भाग लेने वाले कई लोगों ने साफ शब्दों में लिखा है कि कोई भी नियम तब तक काम नहीं करेगा जब तक इंसान का खुद पर नियंत्रण न हो। ‘अपनें पर नियन्त्रण सब से महत्त्वपूर्ण है।

5. शारीरिक और मानसिक रूप से खोखला बनाने वाली बीमारी: लोगों ने लिखा कि धूम्रपान केवल एक आदत नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी गंभीर बीमारी है जो एक अच्छे और स्वस्थ शरीर को अंदर से खाकर ‘खाक’ (नष्ट) बना देती है। इससे कैंसर, हृदय रोग और फेफड़ों की गंभीर समस्याएं होती हैं।

6. स्कूल के प्रार्थना स्थलों से हो शुरुआत: एक व्यावहारिक सुझाव यह आया कि इस जन-जागरूकता अभियान की शुरुआत स्कूल के प्रार्थना स्थल (Morning Assembly) से होनी चाहिए, ताकि बच्चों के मन में बचपन से ही इसके प्रति चेतना पैदा हो।

7. इसे ‘घर-घर का आंदोलन’ बनाना होगा: जनता का दृढ़ विचार है कि जब तक देश का हर नागरिक और हर एक व्यक्ति इस नशामुक्त संकल्प में शामिल नहीं होगा, तब तक बात अधूरी रहेगी। इसे हर घर की दहलीज तक ले जाकर एक बड़ा आंदोलन बनाना होगा।

8. सरकार द्वारा सख्त कानून और कड़ा आर्थिक दंड: लोगों ने मांग की है कि जैसे बचपन में गलत राह पर जाने से रोकने के लिए माता-पिता बच्चों को दंडित करते हैं, वैसे ही सरकार को भी सार्वजनिक स्थानों पर स्मोकिंग करने वाले और इसे बढ़ावा देने वालों पर भारी जुर्माना और सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।

निष्कर्ष –

अंततः, SRRO की यह “अस्तित्व” सर्वे रिपोर्ट और जनता के ये विचार हमें समय रहते सचेत होने का संदेश देते हैं। युवतियों में बढ़ती धूम्रपान की यह प्रवृत्ति केवल एक व्यक्तिगत पसंद नहीं है, बल्कि यह उनके पूरे अस्तित्व और स्वास्थ्य पर एक बड़ा खतरा है। इस समस्या को केवल कानूनी पाबंदियों से नहीं बदला जा सकता; बल्कि इसके लिए पारिवारिक सहयोग, जागरूक समाज और जिम्मेदार डिजिटल मीडिया की सामूहिक आवश्यकता है। आइए, हम सब मिलकर इस दिशा में सकारात्मक कदम बढ़ाएं और एक धूम्रपान मुक्त, स्वस्थ समाज का निर्माण करें।

Written By- Shivangi Pandey

“SRRO works as an implementation partner for Corporate Social Responsibility (CSR ) and social impact projects”

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