डिजिटल साक्षरता: आधुनिक युग की सबसे बड़ी आवश्यकता

आज का युग डिजिटल युग है। हम सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक किसी न किसी डिजिटल माध्यम से जुड़े रहते हैं। मोबाइल फोन, इंटरनेट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और ई-गवर्नेंस जैसी सुविधाएँ हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं।

ऐसे समय में डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) केवल एक कौशल नहीं, बल्कि जीवन की अनिवार्य आवश्यकता बन गई है।

डिजिटल साक्षरता क्या है, इसका महत्व क्या है, भारत में इसकी स्थिति कैसी है, इससे जुड़े लाभ और चुनौतियाँ क्या हैं, तथा इसे बढ़ावा देने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं।

डिजिटल साक्षरता क्या है?

 

डिजिटल साक्षरता का अर्थ है – डिजिटल उपकरणों और इंटरनेट का सही, सुरक्षित और प्रभावी उपयोग करने की क्षमता। इसमें केवल मोबाइल या कंप्यूटर चलाना ही शामिल नहीं है, बल्कि ऑनलाइन जानकारी को समझना, उसका विश्लेषण करना, साइबर सुरक्षा का ध्यान रखना, और डिजिटल माध्यम से संवाद करना भी शामिल है।

डिजिटल साक्षर व्यक्ति:

इंटरनेट पर सही और गलत जानकारी में अंतर कर सकता है।

ऑनलाइन धोखाधड़ी से बच सकता है।

ई-मेल, सोशल मीडिया और डिजिटल भुगतान का सुरक्षित उपयोग कर सकता है।

ऑनलाइन शिक्षा और सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सकता है।

डिजिटल साक्षरता का महत्व

Digital Saksharta: Aadhunik Yug ki Sabse Badi Aavashyakta

1. शिक्षा के क्षेत्र में

कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन शिक्षा का महत्व स्पष्ट हो गया। Zoom और Google Meet जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से छात्रों ने पढ़ाई जारी रखी। यदि डिजिटल साक्षरता न हो, तो विद्यार्थी इन सुविधाओं का उपयोग नहीं कर पाते।

आज ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन कोर्स और डिजिटल लाइब्रेरी छात्रों को वैश्विक ज्ञान तक पहुंच प्रदान कर रहे हैं। डिजिटल साक्षरता शिक्षा को सीमाओं से मुक्त कर देती है।

2. आर्थिक विकास में योगदान

डिजिटल साक्षरता लोगों को ऑनलाइन रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्रदान करती है। फ्रीलांसिंग, डिजिटल मार्केटिंग, कंटेंट क्रिएशन और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में लाखों लोग काम कर रहे हैं।

भारत में Digital India अभियान के तहत डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं को बढ़ावा दिया गया। Unified Payments Interface (UPI) के माध्यम से आज छोटे दुकानदार भी डिजिटल लेन-देन कर रहे हैं। यह सब डिजिटल साक्षरता के कारण संभव हुआ है।

3. सरकारी सेवाओं तक पहुंच

आज आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड, बिजली बिल, गैस बुकिंग जैसी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। Common Service Centres (CSC) ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। डिजिटल साक्षरता के माध्यम से लोग सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से उठा सकते हैं।

4. सामाजिक जागरूकता और संवाद

सोशल मीडिया ने समाज को जोड़ने का कार्य किया है। Facebook, Instagram और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म पर लोग अपनी आवाज़ उठा सकते हैं। सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने में डिजिटल माध्यम की बड़ी भूमिका है।

लेकिन इसके लिए यह जानना जरूरी है कि कौन-सी जानकारी सही है और कौन-सी फेक न्यूज़।

भारत में डिजिटल साक्षरता की स्थिति

भारत तेजी से डिजिटल क्रांति की ओर बढ़ रहा है। सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों तक इंटरनेट पहुंचाने के लिए BharatNet परियोजना शुरू की। इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (PMGDISHA) के माध्यम से करोड़ों लोगों को डिजिटल प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

फिर भी, भारत में डिजिटल डिवाइड (Digital Divide) एक बड़ी चुनौती है। शहरों में इंटरनेट और तकनीक की पहुंच अधिक है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी संसाधनों की कमी है। महिलाओं और बुजुर्गों में डिजिटल साक्षरता का स्तर अपेक्षाकृत कम है।

डिजिटल साक्षरता के लाभ

-समय और धन की बचत

ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल भुगतान से लंबी कतारों से मुक्ति मिलती है।

– पारदर्शिता और सुविधा

सरकारी योजनाओं की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध होने से भ्रष्टाचार में कमी आती है।

– रोजगार के नए अवसर

डिजिटल कौशल के माध्यम से घर बैठे काम करना संभव है।

– वैश्विक संपर्क

दुनिया के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति से तुरंत संवाद संभव है।

डिजिटल साक्षरता से जुड़ी चुनौतियाँ

1. साइबर अपराध

ऑनलाइन फ्रॉड, हैकिंग, फिशिंग और डेटा चोरी जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। यदि व्यक्ति डिजिटल रूप से जागरूक नहीं है, तो वह आसानी से ठगी का शिकार हो सकता है।

2. फेक न्यूज़

सोशल मीडिया पर गलत जानकारी तेजी से फैलती है। डिजिटल साक्षरता का अभाव समाज में भ्रम और तनाव पैदा कर सकता है।

3. तकनीकी संसाधनों की कमी

ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की गति और उपकरणों की उपलब्धता अभी भी सीमित है।

4. भाषा की बाधा

अधिकांश डिजिटल सामग्री अंग्रेजी में उपलब्ध है, जिससे हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के लोगों को कठिनाई होती है।

डिजिटल साक्षरता बढ़ाने के उपाय

स्कूल स्तर पर प्रशिक्षण – बच्चों को प्रारंभिक कक्षाओं से ही डिजिटल शिक्षा दी जानी चाहिए।

ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान – पंचायत स्तर पर डिजिटल प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएं।

महिलाओं के लिए विशेष कार्यक्रम – महिलाओं को डिजिटल कौशल सिखाने से परिवार और समाज दोनों को लाभ होगा।

साइबर सुरक्षा शिक्षा – लोगों को ऑनलाइन सुरक्षा के नियमों की जानकारी दी जानी चाहिए।

क्षेत्रीय भाषाओं में सामग्री – हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में डिजिटल सामग्री बढ़ाई जानी चाहिए।

युवाओं की भूमिका

भारत की युवा आबादी डिजिटल परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत है। युवा न केवल खुद डिजिटल साक्षर बनें, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी जागरूक करें। गांवों में युवा स्वयंसेवक बनकर बुजुर्गों और महिलाओं को डिजिटल उपकरणों का उपयोग सिखा सकते हैं।

भविष्य की दिशा

आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकें और अधिक प्रभाव डालेंगी। यदि हम डिजिटल साक्षर नहीं होंगे, तो हम इन अवसरों से वंचित रह जाएंगे। डिजिटल साक्षरता केवल तकनीकी ज्ञान नहीं, बल्कि जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने की प्रक्रिया है।

निष्कर्ष

डिजिटल साक्षरता आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। यह शिक्षा, रोजगार, सामाजिक विकास और आर्थिक प्रगति का आधार बन चुकी है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए डिजिटल साक्षरता एक शक्तिशाली साधन है, जो समाज को सशक्त बना सकता है।

हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि डिजिटल क्रांति का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। जब हर नागरिक डिजिटल रूप से साक्षर होगा, तभी सच्चे अर्थों में भारत एक डिजिटल महाशक्ति बन सकेगा।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top